UPTET झारखंड लोक सेवा आयोग जजमेंट और 69000 शिक्षक भर्ती पासिंग मॉर्क केस में समतुल्यता? ✍🏼टीम रिज़वान अंसारी

UPTET झारखंड लोक सेवा आयोग जजमेंट और 69000 शिक्षक भर्ती पासिंग मॉर्क केस में समतुल्यता? ✍🏼टीम रिज़वान अंसारी *झारखंड लोक सेवा आयोग जजमेंट और 69000 शिक्षक भर्ती पासिंग मॉर्क केस में समतुल्यता?*

✍🏼टीम रिज़वान अंसारी
*झारखंड लोक सेवा आयोग जजमेंट और 69000 शिक्षक भर्ती पासिंग मॉर्क केस में समतुल्यता?*  ✍🏼टीम रिज़वान अंसारी

18 दिसम्बर 2019 को मा0 सुप्रीम कोर्ट की मा0जस्टिस एल0नागेश्वर राव और मा0 जस्टिस दीपक गुप्ता की खण्डपीठ ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की अपील पर फैसला देते हुए JPSC की अपील को बहाल कर दिया। पूरा का पूरा फैसला एकदम सीसे की तरह साफ है। इस फैसले में न तो किसी का तर्क चलेगा और न ही कुतर्क। पूरा जजमेंट मा0जस्टिस दीपक गुप्ता ने लिखा है। JPSC द्वारा प्रवक्ता पद के लिए SLET (State Level Eligibility Test) परीक्षा तीन चरणों मे निर्धारित की गई थी। जो भी अभ्यर्थी प्रथम और द्वितीय चरण को उत्तीर्ण करेगा वो तीसरे चरण की परीक्षा में प्रतिभाग करेगा। प्रथम और द्वितीय चरण की परीक्षा के कटऑफ पूर्व में तय थे लेकिन तीसरे चरण की परीक्षा में कटऑफ परीक्षा होने के बाद निर्धारित किये गए। *बस विवाद ने यहीं से जन्म लिया*
◼हाइकोर्ट ने अपने फैसले में माना था कि तृतीय चरण की परीक्षा के लिए विज्ञापन में कटऑफ निर्धारित नही किया गया था। परीक्षा के बाद कटऑफ निर्धारित करने के विषय को हाइकोर्ट ने *"खेल के नियम खेल शुरू होने के बाद नही बदलते"* के प्रतिपादित सिद्धांत से को-रिलेट करते हुए JPSC के इस काम को मूल नियम के विरुद्ध मानते हुए अभ्यर्थियों के पक्ष मे फैसला दे दिया।

⁉अब इस फैसले को JPSC ने म0सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। मा0 सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर एकदम सपाट 07 पन्नों का जजमेंट दिया।
◼झारखण्ड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने सबमिशन दिया कि तृतीय चरण की SLET की परीक्षा के कटऑफ निर्धारण के लिए UGC (University Grant Commission) द्वारा SLET की तृतीय चरण की परीक्षा के बाद कटऑफ निर्धारित करने के लिए एक परनियमन समिति 
(moderation committee) का निर्माण किया गया है। ये माडरेशन कमेटी रिजल्ट जारी करते समय कटऑफ तय करने में मदद करेगी जो कि 07 सदस्यीय होगी। मा0 सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि माडरेशन कमेटी का कटऑफ निर्धारित करने का नियम पूर्व में UGC द्वारा निर्धारित था लिहाजा हाइकोर्ट का ये कहना कि *परीक्षा के बाद पासिंग मॉर्क लगाना खेल के नियम बदलने जैसा है* तो ये नियम विरुद्ध है। क्योंकि यहाँ पर खेल के बाद नियम बदले ही नही गए अपितु ये तो प्रवक्ता पद के योग्य अभ्यर्थियों की मेरिट के लिए चयन का एक अतिरिक्त पहलू था जिसे माडरेशन कमेटी ने अपनाया जो पूर्व निहित है। लिहाजा मा0सुप्रीम कोर्ट ने हाइकोर्ट का 09 नवम्बर 2016 का फैसला रद्द करते हुए JPSC के पक्ष में फैसला सुनाया।

*🚩Conclusion-* 
69000 शिक्षक भर्ती पासिंग मॉर्क केस इस केस से बिल्कुल भिन्न है। क्योंकि SLET की इस परीक्षा का पैमाना UGC द्वारा निर्धारित किया था।जिसमे UGC के बनाये गए नियम चले। जबकि इस ATRE की निर्धारणकर्ता एजेंसी सिर्फ स्टेट है। पासिंग मॉर्क निर्धारण में ऐसा कोई नियम ही नही है जो NCTE ने पूर्व में निर्धारित किया हो। इसलिए 69000 ATRE और SLET परीक्षा के पासिंग अंक निर्धारण में समानता करना एकदम बेवकूफी है। 68500 और 69000 शिक्षक भर्ती की नियमावली एक ही हैं। इस नियमावली में कहीं पर भी JPSC की भांति पासिंग अंक तय करने के लिए किसी भी  माडरेशन कमेटी टाइप की कोई समिति गठित नही की गई है जो 69000 ATRE परीक्षा हो जाने के बाद पासिंग अंक तय करे।

*ये दोनों केस आपस में एक दूसरे से कतई को-रिलेट नही है। जिसे ज्यादा सर्दी सता रही है वही इन दोनों केसों में आभासी सम्बन्ध स्थापित करवा रहा है।*

आप सभी निश्चिन्त रहें,बेफिक्र रहें क्योंकि टीम रिज़वान अंसारी देर से बोलेगी लेकिन दुरस्त बोलेगी।क्योंकि शतरंज की बाज़ी धैर्यवान ही जीतता है।
*★लड़ने वाले ही जीतते हैं।।*

*®टीम रिज़वान अंसारी।।*

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