नई शिक्षा नीति में अब पढ़ाई का नया तरीका, 2030 तक 100 फीसदी बच्चों को स्कूल पहुंचाने का लक्ष्य, मिलेगी यह सुविधाएं और होगी कार्यों की समीक्षा भी

नई शिक्षा नीति में अब पढ़ाई का नया तरीका, 2030 तक 100 फीसदी बच्चों को स्कूल पहुंचाने का लक्ष्य, मिलेगी यह सुविधाएं और होगी कार्यों की समीक्षा भी
नई शिक्षा नीति के तहत 2030 तक शत-प्रतिशत बच्चों को स्कूली शिक्षा में  नामांकन कराने का लक्ष्य है। इसका मतलब हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना या शिक्षा से जोड़ना है। इसके अलावा राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण में अब सभी सरकारी और निजी स्कूल शामिल होंगे। पहली बार सरकारी और निजी स्कूलों में एक नियम लागू होंगे। इससे निजी स्कूलों की फीस, पाठ्यक्रम तथा वेतन आदि पर लगाम लगेगी।

10वीं और 12वीं में होने वाली बोर्ड परीक्षा के लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 24 से ज्यादा विषय न हों। एक बार फेल या अच्छा प्रदर्शन न करने पर छात्र को दो या उससे अधिक बार मौका मिलेगा। नौवीं के बाद विषय चुनने का विकल्प होगा। एनसीईआरटी अगले वर्ष तक नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क 2020 तैयार करेगी। अब तक स्कूली शिक्षा नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क 2005 के तहत चल रही है। 2022 की परीक्षा नए पाठ्यक्रम से होगी।
मिड-डे मील में अब नाश्ता भी



ग्रामीण, पिछड़े  व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए स्कूलों में नाश्ता भी मिलेगा। अब तक मिड-डे मील में दोपहर का भोजन मिलता था। इसी साल से पौष्टिक नाश्ता दिया जाएगा। इसके अलावा बच्चों को शारीरिक जांच के आधार पर सभी को हेल्थ कोर्ड भी मिलेगा।

भारी स्कूल बैग से मिलेगा छुटकारा

बच्चों को मोटी-मोटी किताबें नहीं पढ़नी पड़ेंगी। नई नीति में बच्चों को हर विषय के मूल सिद्धांत को आसान तरीकों से समझाया जाएगा। ऐसे में पूरा जोर लिखित परीक्षा की जगह प्रयोगात्मक परीक्षा पर होगा। पढ़ाई का फोकस और कांस्पेट्स, आइडिया, एप्लीकेशन, प्रैक्टिकल, प्राब्लम साल्विंग पर रहेगा। सरकार का मानना है कि दो से आठ साल तक बच्चा सबसे अधिक सीखता है। इसलिए इस उम्र में सीखने पर जोर दिया जाए। 

कस्तूरबा गांधी स्कूलों का विस्तार 12वीं कक्षा तक होगा। जिनकी इकलौती संतान बेटी हो और बेटियों को शिक्षा में बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं बनेंगी। स्कूलों में अपने विषय के साथ-साथ बहुविषयक जानकारियों को बढ़ावा दिया जाएगा। लाइफ स्किल पर अधिक फोकस होगा।

स्कूली शिक्षा की हर पांच वर्ष में समीक्षा

गुणवत्ता सुधारने की की शुरुआत स्कूली शिक्षा से करने के लिए हर पांच साल में समीक्षा होगी। वर्ष 2022 के बाद पैराटीचर नहीं रखे जाएंगे। शिक्षकों की भर्ती सिर्फ नियमित होगी। रिटायरमेंट से पांच साल पहले शिक्षकों की नियुक्ति का काम केंद्र और राज्य शुरू कर देंगे। कूषि और स्वास्थ की पढ़ाई सामान्य विश्वविद्यालयों के साथ प्रोफेशनल संस्थान में छोटे कोर्स पर जोर होगा।
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