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    रेगुलर बीटीसी व विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त 250 शिक्षामित्र और बन सकेंगे 69000 भर्ती में शिक्षक , रिकॉर्ड में बदलाव करने का आदेश

    प्रयागराज : परिषदीय स्कूलों की 69000 शिक्षक भर्ती में करीब 250 शिक्षामित्रों के शिक्षक बनने का रास्ता साफ हो गया है। यह शिक्षामित्र शिक्षक बनने की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण हैं लेकिन, कॉलम में शिक्षामित्र का उल्लेख न होने से वे चयन से बाहर हो गए थे। बेसिक शिक्षा मंत्री की पहल पर उनके रिकॉर्ड में बदलाव करने का आदेश हुआ है, उन्हें वेटेज अंक मिलते ही सभी शिक्षक पद पर चयनित हो जाएंगे। साथ ही मनचाहा जिले में तैनाती मिलेगी। बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों की 69000 सहायक अध्यापक भर्ती का परिणाम परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने जारी किया, इसमें 8818 शिक्षामित्रों ने लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की थी। एक जून को परिषद की ओर से जारी जिला आवंटन सूची में करीब 250 शिक्षामित्रों का नाम नहीं था। इनमें कुछ रेगुलर बीटीसी तो कुछ विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त हैं। इसे दैनिक जागरण ने भी प्रमुखता से उजागर किया था। अचयनित शिक्षामित्रों ने परिषद कार्यालय में प्रत्यावेदन दिया, उनकी मांग थी कि वे वर्षों से शिक्षामित्र के रूप में कार्य कर रहे हैं और परीक्षा भी उत्तीर्ण हैं इसलिए चयन सूची में शामिल किया जाए। 
    कोर्ट से हाथ लगी निराशा : लिखित परीक्षा उत्तीर्ण शिक्षामित्रों ने चयन के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एकल पीठ से लेकर दो जजों की खंडपीठ तक ने उसे खारिज कर दिया। कोर्ट का कहना था कि जो अभ्यर्थी अपना आवेदन सही से नहीं कर सकता उसका शिक्षक होना उचित नहीं है। शिक्षामित्र संघ ने शासन में की पैरवी: शिक्षामित्र संघ के जितेंद्र शाही व अभय आदि नेताओं ने विभागीय मंत्री से अनुरोध किया कि परीक्षा उत्तीर्ण को नियुक्ति का अवसर दिया जाए। अब परिषद उप सचिव अनिल कुमार ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी को पत्र भेजा है कि शिक्षामित्रों को चयन सूची में शामिल किया जाए।

    परिषद ही कर सकता बदलाव : अनिल 
    परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि भर्ती में शिक्षकों का चयन आवेदन सूची के तहत हुआ है। इसमें बेसिक शिक्षा परिषद ने ही कॉलम 14 जोड़ा है, जिसमें पूछा गया है कि शिक्षामित्र कितने वर्ष से स्कूलों में कार्यरत रहा है। साथ ही कॉलम 13 में गलत प्रविष्टि का प्रत्यावेदन भी परिषद को दिया गया है । ऐसे में यह बदलाव परिषद ही कर सकता है।