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    दस्तावेजों की जांच से अध्यापक नाराज, उप मुख्यमंत्री ने कहा न हो उत्पीड़न

    प्रदेश के कई जिलों में राज्य विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों की जांच शुरू हो गई है। कुछ जिलों में जांच कमेटी की कार्रवाई से शिक्षकों में भारी नाराजगी है। इसकी शिकायत उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा तक भी पहुंची है। इस पर उप मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा से कहा है कि शिक्षकों का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। शासन के निर्देश पर सभी जिलों में डीएम की तरफ से नामित एडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई है।
    जांच कमेटी के बारे में अलग-अलग जिलों से अलग-अलग तरह की बातें सामने आ रही हैं। किसी-किसी जिले में जांच कमेटी ने शिक्षकों का भौतिक सत्यापन करने के बाद उनका आधार कार्ड, पैन कार्ड और अंकपत्रों की मूल प्रति देखकर जांच पूरी कर ली तो किसी-किसी जिले में पूरी नियुक्ति प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी गई है। शिक्षकों से पद के विज्ञापन के संबंध में प्रकाशित विज्ञापन की प्रतियां भी मांगी जा रही हैं। लंबी सेवा कर चुके शिक्षकों के पास विज्ञापन की प्रतियां ही नहीं हैं। इसी तरह जिन शिक्षकों ने जाति प्रमाणपत्र लगाया था, उसके सत्यापन के बारे में पूछा जा रहा है। शिक्षकों की इन समस्याओं के संबंध में लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को ज्ञापन भी दिया। इस पर डॉ. शर्मा ने अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस. गर्ग से यह सुनिश्चित करने को कहा कि शिक्षकों का किसी भी तरह उत्पीड़न न हो। उन्होंने यह भी कहा कि प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए शिक्षकों को कलेक्ट्रेट का चक्कर न लगाना पड़े। इस बीच लुआक्टा ने कोरोना संकट के कारण कंटेनमेंट जोन बना दिए जाने के कारण जांच प्रक्रिया स्थगित करने की भी मांग की है। इसके लिए उसने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भी दिया है।
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