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    खातों में पड़ी अवशेष धनराशि को सरेंडर करना शिक्षकों को कर रहा परेशान, जानिए क्या कहतें हैं जिम्मेदार अधिकारी

    मथुरा : ग्राम शिक्षा समिति के खातों की धनराशि को सरेंडर करने को लेकर परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापक परेशान हैं। इन खाते में वजीफे की धनराशि भी है। यह राशि समाज कल्याण विभाग की है। समाज कल्याण द्वारा भविष्य में कार्रवाई करने पर गर्दन फंसने का डर सता रहा है।
    शासन के आदेश पर परिषदीय विद्यालयों की विद्यालय प्रबंध समिति व ग्राम शिक्षा समिति के खातों में 31 मार्च 2019 तक अवशेष धनराशि को जिले के सर्व शिक्षा अभियान के खाते में 22 जुलाई तक जमा करने के आदेश जारी किए हैं। वर्तमान में ग्राम शिक्षा समिति के अधिकांश खाते निष्क्रिय हैं। यह खाते 2013-14 तक ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधान व शहरी क्षेत्र में वार्ड सभासद और प्रधानाध्यापक के द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किए जाते थे। इन खातों में विद्यालय विकास व छात्रों को मिलने वाली वजीफे की धनराशि भेजी जाती थी। वजीफे की धनराशि समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रदान की जाती थी, जबकि वितरण का दायित्व सभासद या ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापक का होता था। विगत सात वर्ष से परिषदीय विद्यालयों में वजीफा बंद हो चुका है। अब विद्यालयों के सभी वित्तीय कार्य एसएमसी खातों से संचालित किए जा रहे हैं।

    धनराशि को सरेंडर करने का आदेश वरिष्ठ अधिकारियों के हैं। यदि इस राशि को सरेंडर करने में कोई दिक्कत आ रही है तो उस पर स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी।
    जेपी सुमन, खंड शिक्षाधिकारी

    यदि वजीफे की राशि खातों में रह गई है तो यह राशि समाज कल्याण विभाग को मिलनी चाहिए। यह राशि अन्य विभाग के खाते में नहीं जा सकती है। इस संबंध में बीएसए को पत्र लिखकर स्थिति को स्पष्ट किया जा जाएगा।
    डॉ. करुणोश त्रिपाठी, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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