Primary Ka Master : बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा अनुदान पर नहीं लिए जाएंगे नए स्कूल, सरकारी स्कूलों में बच्चे कम हुए

बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि नए स्कूलों को अनुदान पर लेने की बजाय पहले से चल रहे स्कूलों में आधारभूत सुविधाएं, देकर शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाया जाए। कोरोना काल में सरकार पर नया वित्तीय बोझ न बढ़े इसलिए नए निजी स्कूलों को अनुदान पर नहीं लिया जाएगा और न ही नए परिषदीय स्कूल खोले जाएंगे। सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के वेतन मद का खर्च केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर उठाती हैं। केंद्र सरकार द्वारा 2012 से नए परिषदीय स्कूल खोलने के लिए धन नहीं दिया जा रहा है।
यूपी में 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के लिए स्कूल खोलने का काम पूरा हो चुका है। केंद्र सरकार से यूपी को वर्ष 2015-16 का 2485.09 करोड़ और वर्ष 2016-17 का 3618.46 करोड़ नहीं मिला है। इस कारण राज्य सरकार को अपने स्रोतों से शिक्षकों का वेतन देने के लिए 6103.55 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।

सरकारी स्कूलों में बच्चे कम हुए : परिषदीय स्कूलों में 2011 के मुकाबले 2018-19 में छात्र नामांकन 23.62 लाख कम है। मानक के अनुसार प्राइमरी में 30 बच्चों पर एक शिक्षक और उच्च प्राइमरी में 35 बच्चों पर एक शिक्षक का मानक है। मगर प्राइमरी में 29 बच्चों पर एक और उच्च प्राइमरी में 21 बच्चों पर एक शिक्षक है।

छात्र शिक्षक अनुपात : प्रदेश के 17 सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चे नहीं हैं। चार स्कूलों में एक से 10 बच्चे हैं। 15 स्कूलों में 11 से 20, 46 प्रतिशत स्कूल हैं जिनमें 150 तक छात्र हैं।
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