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    BEO 2019 : खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) भर्ती फर्जीवाड़ा: कई जिलों में फैला है कोचिंग संचालक का नेटवर्क, अभ्यर्थियों से लेता था मोटी रकम

    प्रयागराज : खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) पद के लिए की रविवार को आयोजित परीक्षा में सॉल्वर और अभ्यर्थी की गिरफ्तारी के बाद अब कोचिंग संचालक की तलाश तेज हो गई है। अभी तक की जांच में यह पता चला कि कोचिंग संचालक का नेटवर्क प्रदेश के कई जिलों में था। सॉल्वर की व्यवस्था, फर्जी प्रवेश व पहचान पत्र के साथ ही अभ्यर्थी के साथ साल्वर की फोटो का मिलान कोचिंग संचालक करता था।
    उप्र लोक सेवा आयोग ने बीईओ पद के लिए रविवार को परीक्षा कराई थी। चिन्मय विद्यालय रसूलाबाद तेलियरगंज से सुनील कुमार पाल निवासी बभनी थाना मेजा को एसटीएफ ने वास्तविक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देते पकड़ा था। उसकी निशानदेही पर केंद्र के बाहर मौजूद अभ्यर्थी धीरेंद्र कुमार निवासी मवैया हंिदूुवानी सरायममरेज थाना हंडिया, को भी दबोचा गया था। दोनों से पूछताछ के बाद बघाड़ा क्षेत्र में कोचिंग चलाने वाले आशुतोष नाथ का नाम सामने आया था। एसटीएफ ने आशुतोष नाथ के बारे में पता लगाया गया तो मालूम हुआ कि जहां कोचिंग है वहीं वह रहता है। नेटवर्क जौनपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, कौशांबी, संत रविदास नगर, रायबरेली, वाराणसी, कानपुर समेत कई जिलों के सॉल्वर गैंग से है। अभ्यर्थियों से मोटी रकम ली जाती है और सॉल्वर को चंद रुपये ही दिए जाते हैं। अभ्यर्थियों को आशुतोष नाथ के पास भी भेजा जाता है और जब सौदा तय हो जाता है तो सॉल्वर की व्यवस्था होती है।

    कोचिंग संचालक की गिरफ्तारी के बाद कई चीजों से पर्दा उठेगा। किन-किन परीक्षाओं में उसने सॉल्वर बैठाए थे और कितने रुपये लिए थे सब कुछ सामने आएगा। साथ ही उसके गैंग के अन्य सदस्यों के बारे में भी जानकारी मिलेगी। नवेंदु सिंह, सीओ, एसटीएफ।

    गरीब छात्रों को फंसाते हैं जाल में

    सॉल्वर ऐसे छात्र को चुना जाता है जो मेधावी होने के साथ ही गरीब होता है। पहले उसे तरह-तरह के प्रलोभन दिए जाते हैं। जब उसका झुकाव गैंग की तरफ हो जाता है तो उसे इस दलदल में उतार दिया जाता है। एक बार अगर उसे यह गैंग परीक्षा में बैठाने में कामयाब हो जाता है तो बार-बार उससे काम लेता है।