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    सरकारी स्कूल के शिक्षक को राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित , खेल-खेल में पढ़ाई, आसानी से गणित सिखाई

    मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में एक ऐसा स्कूल है, जहां पत्थरों पर उकेरे गए चित्रों और शब्दों से बच्चे पढ़ाई करते हैं। प्राइमरी के बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी की किताब पढ़ते हैं। बच्चों के सामान्य ज्ञान का स्तर भी उच्च कक्षाओं जैसा है। यहां किए गए नवाचारों से जिले के डूडा गांव का सरकारी स्कूल प्रदेशभर में मॉडल बन गया है। शून्य निवेश कर ही शिक्षण प्रक्रिया को रोचक बना दिया गया है। यहां पेड़ों पर शिक्षण सामग्रियां अंकित हैं। जगह-जगह चार्ट लगे हैं। शिक्षक संजय कुमार जैन की मेहनत से स्कूल का कोना-कोना शिक्षण गतिविधियों से घिरा हुआ है।
    प्रोजेक्टर सहित लैपटाप: ऐसा नहीं है कि स्कूल में केवल पुरानी तकनीक से ही बच्चों को पढ़ाया जा रहा है बल्कि यहां प्रोजेक्टर, लैपटाप सहित नवीन उपकरणों का प्रयोग शिक्षण में हो रहा है। स्कूल प्रबंधन ने ये सभी चीजें बिना सरकारी मदद के सामाजिक सहयोग से प्राप्त की हैं। संजय कुमार जैन ने बताया कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के प्रदर्शन से प्रसन्न होकर जिले के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर स्कूल की व्यवस्थाओं में सहयोग किया है। स्कूल में आईसीटी द्वारा आनंददायक तरीके से सीखने की तकनीकी का उपयोग भी किया जाता है।

    नवाचार की प्रयोगशाला बना स्कूल: डूडा गांव के इस स्कूल में 87 बच्चे अध्यनरत हैं। स्कूल अब नवाचार को लेकर प्रयोगशाला बन चुका है। यहां वर्तमान में करीब 80 प्रकार के नवाचारों द्वारा शिक्षण कार्य किया जाता है, जिसमें पाषाण, चकरी खेल, अंग्रेजी चौपाल, पौधारोपण नवाचार, लगड़ी टांग खेल द्वारा बच्चों को अक्षर ज्ञान कराना, कंकड़ फेंको जोड़ करो, कार्ड उठाओ जगह बनाओ सहित अनेक नवाचार शामिल हैं।

    गांव का निजी स्कूल हो गया बंद: गांव में निजी स्कूल संचालित होता था, लेकिन इस सरकारी स्कूल में नवाचारों के कारण बच्चों की रुचि बढ़ गई। शिक्षकों द्वारा बेहतर शिक्षा प्रदान की जाती है। इस कारण निजी स्कूल से बच्चे सरकारी स्कूल में एडमिशन लेने पहुंच गए।

    राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित: स्कूल में दो शिक्षक संजय कुमार जैन और रितु भट्ट पदस्थ हैं, जबकि तीन अन्य गांव के शिक्षक अíपता जैन, अदिति जैन, हेमंत कुमार जैन निशुल्क सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षक संजय कुमार जैन ने बताया कि वह स्वयं ही 1985-86 में इस स्कूल में पढ़ते थे। बाद में शिक्षक बनने के बाद स्कूल में पदस्थापना हुई और फिर स्कूल को बेहतर करने की सोची। आज वह स्वयं की मेहनत से बेहद खुश हैं। स्कूल को पांच बार कलेक्टर द्वारा अवार्ड दिया गया। शिक्षक संजय कुमार जैन पिछले साल मध्य प्रदेश के राज्यपाल द्वारा सम्मानित किए गए हैं जबकि अब 5 सितंबर 2020 को दिल्ली में राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किए जाएंगे।

    पत्थरों से पढ़ रहे बच्चे

    स्कूल के शिक्षक संजय कुमार जैन ने बताया कि स्कूल परिसर में बड़े-बड़े पत्थर और चट्टानें धसी हुईं थीं। ये स्कूल की सुंदरता पर धब्बा नजर आती थीं, लेकिन हम लोगों ने नवाचार करते हुए इन चट्टानों पर अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान, हिंदी, गीत, गणित सहित अन्य शिक्षण सामग्रियों को रंग-बिरंगे तरीकों से सजाया। इससे बच्चे इस ओर आकर्षति हुए। अब खेलते समय भी बच्चे यहां पर पढ़ते हैं या उन्हीं में कुछ खेल भी तलाश लेते हैं।

    स्कूल में पत्थरों पर लिखी पाठ्य सामग्री से पढ़ाई करते बच्चे ’ नई दुनिया

    ज्ञान बिना हर व्यक्ति अधूरा है। व्यक्ति को संपूर्ण करने का माध्यम हमारे शिक्षक बनते हैं जो अपने पठन-पाठन के नए-नए तरीकों से हमारे दिमाग की कुंजी खोलते हैं। हर शिक्षक के पढ़ाने का तरीका मौलिक होता है लेकिन हर किसी का सपना विद्यार्थी की मौलिकता को बाहर लाना होता है। देश के ऐसे ही कई शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चुना गया है जिन्होंने न सिर्फ अपने तरीकों से शिक्षण की दुनिया में अलग जगह बनाई बल्कि विद्याíथयों के बेहतर परिणामों के जरिए उनके बीच प्रिय शिक्षक की उपाधि भी पाई। आज से एक पखवारे तक हमारे शिक्षक अभियान के तहत हम ऐसे ही एक शिक्षक की कहानी बताएंगे। आज बात राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से पुरस्कृत ऐसे ही शिक्षक संजय कुमार की।