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    संदिग्ध अध्यापकों के केस में रिपोर्ट देने से कतरा रहे अधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारियों ने उच्च शिक्षा निदेशालय को नहीं भेजी रिपोर्ट

    प्रयागराज : शासन की भ्रष्टाचार खत्म करने की मुहिम को उनके अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। अधिकारी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का पहले खुलासा नहीं करते। अगर खुल जाता है तो गलत लोगों को बचाने के लिए अधिकारी भरसक प्रयास करते हैं। राज्य विश्वविद्यालय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कालेजों में कार्यरत शिक्षकों के मामले में कुछ ऐसा ही चल रहा है। शासन के निर्देश पर हुई जांच में 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले हैं। गड़बड़ी कहां और कैसे हुई? उसकी पड़ताल करके क्षेत्रीय अधिकारियों से 17 अगस्त को अंतिम रिपोर्ट मांगी गई थी। लेकिन, अधिकारियों ने अभी तक रिपोर्ट नहीं भेजी।
    शासन ने राज्य विश्वविद्यालय व एडेड डिग्री कालेजों में शिक्षकों की नियुक्ति में होने वाली गड़बड़ी रोकने व सारी प्रक्रिया पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। सारे शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच करके उसे ऑनलाइन किया जाएगा। इसके तहत समस्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कराई गई है। बीते 30 जुलाई तक 11,412 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हुई। इसमें 27 शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध मिले थे। सबसे अधिक मेरठ परिक्षेत्र के 22 शिक्षक हैं। इनकी मार्कशीट में नाम बदलने, जन्म तारीख में बदलाव, फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निदेशालय से हर पहलु पर पड़ताल कराकर रिपोर्ट मांगी है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा ने सारे क्षेत्रीय अधिकारियों को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट मांगी थी। जो अभी तक नहीं भेजी गई। निदेशक डॉ. वंदना का कहना है कि रिपोर्ट देने के लिए दोबारा पत्र भेजा गया है।