MDM घोटाला:- 16 बार में एमडीएम के खाते से निकाल लिया 1.26 लाख रुपये, ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक को दो महीने बाद हुई जानकारी

16 बार में एमडीएम के खाते से निकाल लिया 1.26 लाख रुपये, ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक को दो महीने बाद हुई जानकारी, तहरीर दी
(देवरिया)। बैंक खातों को लेकर हर कोई सावधान हो जाए। आपकी जानकारी के बगैर भी बैंक सह खातेदार बना सकता है और इसके बाद खाते से आसानी से रुपये भी निकल जाएंगे। आपको जब तक इसकी खबर मिलेगी, तब तक खाते से रकम निकल गई होगी। ऐसा ही मामला खुखुंदू थानाक्षेत्र के महराजपुर के बरेजी के प्राथमिक विद्यालय का सामने आया है। यहां के एमडीएम खाते में सह खातेदार बनकर विद्यालय की पूर्व रसोइए ने 126020 रुपये दो माह पूर्व निकाल लिए। पासबुक प्रिंट कराने पर इस बात की जानकारी ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक को हुई। इस मामले में थाने में तहरीर दी गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
विकास खंड देवरिया सदर के समिलियन विद्यालय बरेजी का एमडीएम का खाता बड़ोदा यूपी बैंक सिविल लाइंस देवरिया में है। ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक का ज्वाइंट खाता है। बताया जा रहा है कि बिना इनके हस्ताक्षर के उस खाते से रुपये की निकासी नहीं होना चाहिए। हालांकि बिना इन दोनों जिम्मेदारों के हस्ताक्षर के ही खाते से 126020 रुपये निकल गए। यहां खास बात है कि मई में खाते से बारी-बारी कर 16 बार में यह रकम गांव और बतरौली के ग्राहक सेवा केंद्रों से निकाली गई। हालांकि इसकी किसी को भनक तक नहीं लगी। कुछ दिन पूर्व बच्चों के खाते में एमडीएम का पैसा भेजने का मामला आने पर पासबुक को प्रिंट कराने के लिए बैंक में भेजा गया तो निकाली गई रकम की जानकारी हुई।
शाखा से इसकी जानकारी लेने पर गांव की एक महिला का नाम सामने आया। वह पूर्व में विद्यालय की रसोइया रही है। इसकी जानकारी मिलते ही ग्राम प्रधान अच्युतानन त्रिपाठी और प्रधानाध्यापक रीता मिश्रा ने उसके घर पहुंच रुपये वापसी की मांग की। उसने देने से इनकार कर दिया। ग्राम प्रधान ने इस मामले में थाने में तहरीर दी है। एसओ श्यामसुंदर तिवारी ने बताया कि तहरीर मिली है। प्रकरण की जांच की जाएगी।

सह खातेदार कैसे जुड़ गया :- इसे सिस्टम की लापरवाही कही जाए या फिर बैंक की मिलीभगत। आखिर एमडीएम खाते में ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यायक सह खातेदार हैं तो उसमें तीसरा कोई और कैसे जुड़ गया। एमडीएम खाते में केवल सरकारी पैसा आता है। जिसे प्रधान और प्रधानाध्यापक ही चेक द्वारा निकाल सकते हैं। ऐसे में तीसरा सह खाताधारक कैसे बन गया और उसे चेक कहां से मिला।
बैंक से रुपये तीसरा कोई कैसे निकाल लिया। बिना चेक से एमडीएम खाते से भुगतान नहीं होता है। इस खाते में दो के अलावा तीसरा सह खातेदार कैसे जुड़ा। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि बैंक की मिलीभगत से यह सब हुआ है। जबकि रसोइया विद्यालय से 2018 में निकाली जा चुकी है।
-अच्युतानन त्रिपाठी, ग्राम प्रधान
जुलाई में विद्यालय खुलने पर एमडीएम का पैसा आया है कि नहीं चेक कराने के लिए बैंक में पासबुक भेजने पर रुपये निकासी का पता चला। सभी रुपये ग्राहक सेवा केंद्रों से निकाला गया है। आखिर यह सब कैसे हो गया। सोच कर डर लग रहा है। इसमें सरासर बैंक की लापरवाही झलक रही है।
-रीता मिश्रा, प्रधानाध्यापक
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