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    69000 सहायक शिक्षक भर्ती में हर कदम पर विवाद, अधर में चयनित: नियुक्ति के इंतजार में सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी

    प्रयागराज : प्राथमिक स्कूलों की 69000 सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़े विवाद खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। भर्ती के कटऑफ अंक को लेकर हाईकोर्ट में याचिका हुई पिछले माह शीर्ष कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है आदेश कोर्ट ने सुरक्षित रखा है। वहीं, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में भी प्रकरण की सुनवाई चल रही है। परीक्षा व सहायक अध्यापक चयन संस्था बारी-बारी से कटघरे में आ चुके हैं। जिला आवंटन पा चुके 67867 अभ्यर्थी दो माह से नियुक्ति पाने का इंतजार कर रहे हैं।
    सहायक अध्यापक भर्ती पहले कटऑफ अंक को लेकर हाईकोर्ट में लंबे समय तक फंसी रही। ज्ञात हो कि अभ्यर्थियों का एक वर्ग 68500 भर्ती की तर्ज पर कटऑफ अंक पर चयन की मांग कर रहा है, जबकि शासन ने इस भर्ती में सामान्य का 65 और अन्य आरक्षित वर्ग का कटऑफ अंक 60 प्रतिशत तय किया है। प्रश्नों के जवाब को लेकर ऐन वक्त पर काउंसिलिंग रोकनी पड़ी। शिक्षामित्रों के चयन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 37339 पद भरने पर रोक लगाई। हर बार कोर्ट ने भर्ती के अहम मोड़ पर स्थगनादेश जारी किया। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने तीन जून को लिखित परीक्षा में पूछे गए 142 प्रश्नों का यूजीसी के विशेषज्ञों से परीक्षण कराने का आदेश दिया था। उस पर 12 जून को दो जजों की पीठ ने रोक लगाकर प्रश्नों के विवाद का अंत कर दिया। लेकिन, नौ जून को शीर्ष कोर्ट के आदेश की वजह से यह भर्ती अधर में है। प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट का 12 जून का आदेश आने के बाद शीर्ष कोर्ट में मॉडिफिकेशन याचिका दाखिल करके सुनवाई का अनुरोध किया था, सरकार का कहना था कि नौ जून का आदेश उसे बिना सुने किया गया है। सुनवाई पूरी हो चुकी है लेकिन, आदेश मिलने का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे ही राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग ने भी भर्ती की चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि इसी बीच करीब 250 शिक्षामित्रों के शिक्षक बनने का रास्ता भी साफ हुआ है। सभी की निगाहें शीर्ष कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।