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    Teachers : प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर छंटनी


    यूपी में लखनऊ के निजी स्कूलों में शिक्षकों की बंपर छंटनी शुरू कर दी गई है। निजी स्कूल प्रबंधनों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। छोटे स्कूल तो छोड़ दें शहर के कई नामचीन स्कूल तक इसमें शामिल हैं। सबसे ज्यादा  प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की हालत खराब है। कई बड़े स्कूलों ने इनके शिक्षकों को बिना वेतन के घर बैठा दिया है। शिक्षकों से कहा गया है कि जब हालात सामान्य होंगे और बच्चे स्कूल आएंगे तब बुला लिया जाएगा।
    राजधानी में यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईएससी और बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े निजी स्कूलों की संख्या 15 सौ से ज्यादा है। 

    निजी स्कूल प्रबंधनों ने फीस न होने का कारण बताकर शिक्षकों की छंटनी शुरू कर दी है। कई छोटे स्कूलों ने तो अप्रैल माह से वेतन नहीं दिया है। अब बड़े और नामचीन स्कूलों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।

    गोमतीनगर में संचालित शहर के एक नामचीन स्कूल ने अपने शिक्षकों को अब फीस के अनुपात में वेतन देने की घोषणा कर दी है। वहीं, इसी इलाके के एक अन्य निजी स्कूल प्रबंधन ने वेतन को काटकर आधा कर दिया है। ऐसे कई मामले शहर के कई स्कूलों में देखने को मिले हैं।

    प्री-प्राइमरी और प्राइमरी में हाल ज्यादा खराब
    राजधानी में करीब 20 से 25 हजार बच्चे हर साल निजी स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं से पढ़ाई शुरू करते हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए अभिभावकों ने अपने छोटे बच्चों का एडमीशन प्री-प्राइमरी कक्षाओं में इस साल नहीं कराया है। इसकी सीधी मार यहां पढ़ाने वाले शिक्षकों पर पड़ी है। आलम यह है कि करीब 40 प्रतिशत प्री-स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। कई बंद भी हो चुके हैं। जो स्कूल ऑनलाइन क्लासेज चला भी रहे हैं वहां, बच्चों की संख्या कम होने के कारण वेतन तक कम कर दिया गया है।

    अनिल अग्रवाल (अध्यक्ष, अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन) ने कहा, कोई भी स्कूल अच्छे शिक्षकों के बिना नहीं चल सकता। आज हालात खराब हैं। कल फिर अच्छे हो जाएंगे। अभिभावकों द्वारा फीस न दिए जाने के कारण निजी स्कूलों की माली हालत भी बिगड़ी है। शिक्षक और कर्मचारी के इस तरह के  प्रकरणों में नियमों के साथ मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखना जरूरी है।