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    कक्षा 1,2 को आंगनबाड़ी का हिस्सा बनाने के तुरंत बाद ही एक बहुत बड़ा खेल शुरू हो जाएगा,

     कक्षा 1,2 को आंगनबाड़ी का हिस्सा बनाने के तुरंत बाद ही एक बहुत बड़ा खेल शुरू हो जाएगा,


    जैसे -
    1- स्कूलों की छात्र संख्या कक्षा 3,4,5 के आधार पर निर्धारित होगी ।ऐसा होते ही शिक्षक छात्र अनुपात के आधार पर प्रत्येक विद्यालय में बहुत से शिक्षक सरप्लस हो जाएंगे इनका अन्यत्र समायोजन करना पड़ सकता है अथवा परिणामस्वरूप नए शिक्षक भर्तियों पर रोक लगाई जा सकती है,।
    2- कंपोजिट ग्रांट की वर्तमान व्यवस्था में 250 से अधिक छात्र संख्या पर 75000 और 100 से अधिक संख्या वाले विद्यालयों को 50,000 स्वीकृत किया जाता है । अनुमानतः ऐसे दोनों ही विद्यालयों की छात्र संख्या घटकर 100 से कम वाली श्रेणी में आ जाएगी अर्थात ₹25000 में ही ज्यादातर विद्यालयों का काम चल जाएगा। सरकार को शिक्षा पर व्यय घटाने का बहाना मिल जाएगा।
    3- जिन विद्यालयों में कक्षा 3, 4 ,5 का योग 20 या 30 बच्चों से कम होगा उनको यह कह कर बंद कर दिया जाएगा कि वहां  सरकारी विद्यालय की आवश्यकता नहीं है, ऐसे विद्यालयों को अनुपयोगी घोषित करने का चलन आजकल वैसे भी बढ़ रहा है, हमारे शिक्षक समाज में भी बहुत से समर्थक भरे पड़े हैं।
    4- बचे खुचे विद्यालय में भी हेड मास्टरों का पोस्ट समाप्त हो जाएगा क्योंकि अधिकांश स्कूल में 150 से कम संख्या ही रह जाएगी।
    5- आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से शिक्षामित्रों, आंगनबाड़ी कर्मियों, अथवा सेवा प्रदाताओं के माध्यम से संविदा आधारित कर्मियों की नियुक्तियों में तेजी आएगी और निजी करण की गति बढ़ेगी ।विरोध करने वाला कोई नहीं होगा और इसका डर दिखाकर हमारी भी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।

    अगर मैं भ्रम फैला रहा हूं तो तर्क देकर मेरा भ्रम दूर कीजिए।
     इसलिए हम सबको मिलकर इस पर कोई सार्थक चर्चा करनी चाहिए विरोध करना चाहिए।

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