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    उत्तर प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में 50% प्रतिशत कर्मचारी ही बुलाए जाएंगे, सरकार ने लिया फैसला

    लखनऊ : राज्य सरकार के दफ्तरों और उनके अनुभागों में स्वीकृत पदों के सापेक्ष समूह ‘ग’ व ‘घ’ के 50 प्रतिशत कार्मिकों की उपस्थिति अब अनिवार्य होगी। बाकी कर्मचारियों को रोस्टर के आधार पर वर्क फ्रॉम होम की अनुमति के बारे में विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और विभागाध्यक्ष अपने विभागीय मंत्री से अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं। इसी तरह समूह ‘क’ और ‘ख’ के सभी अधिकारी दफ्तर में उपस्थित रहेंगे
    प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है।

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    कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार ने सभी सरकारी दफ्तरों, निकाय और निगम कार्यालयों में समूह ग और घ के 50 फीसदी कर्मचारी ही दफ्तर बुलाने का निर्णय लिया है। वहीं समूह क और ख के सभी अधिकारियों को रोज ऑफिस आना होगा। सरकार ने बुधवार को इसका आदेश जारी कर दिया। हालांकि यह व्यवस्था कोविड-19 की रोकथाम के साथ ही आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं से जुड़े अधिकारियों पर लागू नहीं होगी।

    मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश देने के साथ ही अपने कार्यालय में भी सोशल डिस्टेंसिंग की स्थिति का स्वयं आकलन करने को कहा है। मुख्य सचिव ने समूह ग और घ के स्वीकृत पदों के सापेक्ष 50 प्रतिशत कर्मचारियों को दफ्तर बुलाने और शेष कर्मचारियों को रोस्टर के अनुसार घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने के लिए संबंधित विभागीय मंत्री से अनुमति लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दफ्तर आने वाले कर्मचारियों-अधिकारियों को समय पर आने और निर्धारित समय तक मौजूद रहने के भी निर्देश दिए हैं। 
    मुख्य सचिव ने वर्क फ्रॉम वाले कर्मचारियों को मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक साधनों के जरिए दफ्तर से संपर्क बनाए रखने को कहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बुलाया जा सके। अभी तक सचिवालय में पिछले दिनों से ही 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य करने की व्यवस्था लागू की गई है।