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    Primary Ka Master : कोरोना(Covid-19) संकट में गरीब की कमाई पर भारी ऑनलाइन पढ़ाई, किस्त पर खरीदा कई अभिभावकों ने फोन

    कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई कई परिवारों के लिए भारी पड़ रही है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के सामने सबसे अधिक मुश्किल आ रही है। विकासखंड बहरिया के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेरुई में कक्षा 7 के मेधावी छात्र प्रतीक मिश्रा को ही लें। प्रतीक की मां निरमा देवी परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य है। वह राज नारायण इंटर कॉलेज बहरिया में दाई है और महज ढाई हजार रुपये महीने वेतन मिलता है। प्रतीक की 4 व 5 साल की दो छोटी बहनें हैं जो स्कूल नहीं जातीं और पिता कृष्ण मुरारी मिश्रा बेरोजगार हैं।
    आर्थिक रूप से अत्यधिक कमजोर यह परिवार राज नारायण विद्यालय कैंपस में ही रहता है क्योंकि इनका खुद का कोई घर नहीं है। लॉकडाउन के बाद 10 अप्रैल से ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई तो प्रतीक किसी तरह जियो के की-पैड वाले फोन पर उपलब्ध व्हाट्सएप सुविधा से पढ़ने लगा। लेकिन कुछ समय बाद वह टूट गया। बेटे की पढ़ाई बाधित होने पर मां निरमा देवी परेशान हो उठीं। इस पर उन्होंने मार्च, अप्रैल और मई में जनधन खाते में मिले 500-500 रुपये कुल 1500 बैंक से निकालकर और 500 रुपये अपनी तरफ से लगाकर 2000 रुपये डाउनपेमेंट करते हुए 13 जुलाई को बेटे को सैमसंग का स्मार्टफोन दिला दिया।
    सात हजार रुपये कीमत के स्मार्टफोन की बची हुई राशि 5000 हजार अब वह हर महीने एक हजार रुपये की किस्त के रूप में चुकाएंगी। निरमा देवी ने हिन्दुस्तान को बताया- 'दिन-रात मेहनत इसी बच्चे के लिए करते हैं। ऑनलाइन क्लास के लिए मैडम कह रहीं थीं, आगे बढ़ाने के लिए बच्चे को कुछ न तो कुछ करना ही पड़ेगा, कुछ परेशानी तो उठानी पड़ेगी।'

    इनका कहना है
    दुर्गावती मिश्रा (विज्ञान शिक्षिका, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेरुई) ने कहा, प्रतीक पढ़ने में बहुत मेधावी है। शुरुआत में व्हाट्सएप के जरिए ऑनलाइन क्लास कर रहा था। लेकिन कुछ समय बाद उसका फोन खराब हो गया। उसकी पढ़ाई बाधित हुई तो हमने परिवार वालों से एक स्मार्टफोन का इंतजाम करने का अनुरोध किया क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि इतना तेज बच्चा, पढ़ाई से वंचित रह जाए।

    परिषदीय स्कूलों के दो लाख से अधिक बच्चे हाईटेक शिक्षा से दूर
    प्रयागराज जिले के 2477 परिषदीय प्राथमिक एवं 1001 उच्च प्राथमिक स्कूलों में तकरीबन 4.16 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। पिछले चार महीने में दो लाख बच्चों को जोड़ा जा सका है। यानि 50 प्रतिशत बच्चे अभी भी हाईटेक शिक्षा से दूर हैं। सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक प्रशिक्षण डॉ. विनोद मिश्र ने बताया कि सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के माध्यम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाते हुए शिक्षकों-शिक्षिकाओं के साथ बच्चों को जोड़ा गया है। वर्तमान में 2 लाख बच्चे ऑनलाइन शिक्षा का लाभ उठा रहे हैं।