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    खाली पदों का अधियाचन मंगाकर जल्द शिक्षकों की भर्ती पूरी करे सरकार

    प्रयागराज : शीर्ष कोर्ट ने संजय सिंह समेत 547 याचियों की एक साथ सुनवाई करते हुए कहा है कि उप्र के अशासकीय सहायताप्राप्त कालेजों में प्रबंधतंत्र की ओर से नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को किसी दशा में विनियमित नहीं किया जा सकता। खाली पदों को भरने के लिए अब सरकार अधियाचन मंगाकर जल्द भर्ती पूरा करे।
    कोर्ट ने नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की टीजीटी पीजीटी की परीक्षा में सामान्य प्रतियोगियों के साथ परीक्षा में बैठने का आदेश दिया है। कोर्ट ने तदर्थ शिक्षकों को जुलाई 2021 तक केवल एक बार परीक्षा में बैठने का मौका दिया है। खंडपीठ ने सत्र 2020-21 की शुरुआत यानी जुलाई 2021 तक चयन बोर्ड से चयनित नियमित शिक्षक उपलब्ध कराने का आदेश सरकार को दिया है। कोर्ट ने कहा कि इन तदर्थ शिक्षकों को परीक्षा में कुछ अंकों का वेटेज दिया जा सकता है, यह वेटेज प्रवक्ता पद के लिए इंटरव्यू के स्तर पर देय होगा और टीजीटी पद के लिए इंटरव्यू न होने की दशा में लिखित परीक्षा में ही देय होगा लेकिन यह वेटेज सामान्य परीक्षा का एक हिस्सा होगा। कोर्ट ने कहा है कि भविष्य में किसी भी दशा में तदर्थ नियक्ति न किया जाए। तदर्थ नियुक्ति शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक हैं।

    यह मामला दिसंबर 2015 में हाईकोर्ट इलाहाबाद के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ के द्वारा सुनाये गये उस फैसले से जुड़ा है जिसमें बेंच ने एडेड माध्यमिक विद्यालयों में हुई तदर्थ नियुक्तियों को अवैध माना था। संजय सिंह ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अगस्त 2016 में अपील कर तदर्थ शिक्षकों को विनियमित करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने तदर्थ रूप से नियुक्त शिक्षकों को विनियमित करने से मना कर दिया। कोर्ट ने धारा 142 का प्रयोग करके तदर्थ शिक्षकों के लिए बीच का रास्ता निकाला। कोर्ट ने जुलाई 2021 के बाद परीक्षा पास न कर पाने वाले तदर्थ शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का आदेश दिया है।

    युवा मंच के अध्यक्ष अनिल सिंह का कहना है कि कहना है कि सरकार को सभी खाली पदों का अधियाचन मंगाकर विज्ञापन जारी कर देने चाहिए जिससे जुलाई 2021 तक भर्ती पूरी की जा सके।